रिश्तेदार नेता जी के परेशान शर्मा जी

आज शर्मा जी मन ही मन बड़े खुश थे, मानो मन से बहुत बड़ा बोझ हट गया हो। आज उन्होंने स्वभाव के विपरीत सामने वाले को कड़वी परन्तु सही बात बोल दी थी।
दरसल क्या है शर्माजी एक सम्मानित स्वास्थ्य संस्थान में नौकरी करते हैं प्रतिदिन ढाई हजार से तीन हजार मरीज हॉस्पिटल में उपचार के लिए आते हैं। भीड़ ज्यादा होने के कारण लोग कोई जानकर खोजते हैं। शर्मा जी पास के जिले के हैं तो आगन्तुक ज्यादा ही आते रहते हैं। पहले पर्चा बनवाने से शुरू होकर बात जाँच कराने एडमिशन कराने से लेकर ऑपरेशन तक चलती है।बात यहीं खत्म हो जाये तो कोई बात नही,परेशानी तब होती है जब वो घर जाकर जानकर रिश्तेदारों में शेखी बघारते हैं कि भीड़ थी पर मेरा काम कैसे हो गया।इससे रोज दिखाने वालो की लाइन लम्बी होती जा रही थी कि सेवा से शुरू हुआ काम सिरदर्द बनता जा रहा था।हालत ये थी कि लोगो के रात में दिन में हर समय फोन आते। एक नेताजी ने तो हद कर दी थी, कभी वो जानकर भाभी के लिए कॉल करते कभी रिश्तेदार के लिए। शर्मा जी इतने परेशान कि फोन न उठायें। फोन रिसीव न करना गलत है मगर इतने लोगो के फोन आते थे कि क्या करें क्या न करे परेशान थे, पर जब भगवान सोलुशन देता है तो हल खुद चल कर आता है।आज सुबह शर्मा जी से सहकर्मी ने पुछा भैय्या क्या बात है, बस मानो शर्मा जी फट पड़ने को तैयार थे।उन्होंने सहकर्मी को कुर्सी दी और सारी बात बता दी। सहकर्मी ने कहा कि भैया आपको छुपने या परेशान होने की आवश्यकता नही है। बस इतना कीजिये जो बोले उनके जानकर या रिश्तेदार आ रहे हैं तो बोलिए उनका सम्मान है एक काम कीजिये आपके रिश्तेदार हैं तो आप भी आइये। बात खत्म होनी थी कि थोड़ी देर में नेताजी का फोन आया कि मेरे एक रिश्तेदार हैं उन्हें अमुक विभाग में दिखा दीजियेगा। शर्मा जी ने बड़ी शालीनता से कहा बड़ा अच्छा किया भाई साहब , आपसे मिले भी काफी समय हो गया इस बहाने से आपके भी दर्शन हो जायेंगे। नेता जी बड़े खुश हुए और बनावटी हँसी के साथ बोले धन्यवाद शर्मा जी पर मैं तो व्यस्त हूँ मैं नही आ पाऊँगा आप ही दिखा देना, मेरे निजी हैं थोड़ा ख्याल रखना। शर्मा जी ने दोबारा शब्दों में बड़ी शालीनता बरतते हुए कहा कि भाई साहब जब आपके निजी हैं और रिश्तेदार हैं फिर भी आप समय नही निकाल पा रहे हैं तो आप समझिये सामने वाला भी तो जॉब करता होगा, उसके पास भी काम हैं, आप जैसे मिलने वाले बहुत परिचित हैं मैं  सबकी सेवा में रहता हूँ, यदि जानकर अपनी झूठी शान के लिये अपने जानकारों को भी मेरा नम्बर देने लगेंगे तो आप समझिये कितनी परेशानी होगी।यदि आपके मित्र हैं तो उन्हें दिखाने से मुझे कोई गुरेज नही है पर अपनी जानकारी रिश्तेदारी मजबूत करने को आप भी तो समय निकालिये। माफ कीजियेगा यदि आपके पास अपने रिश्तेदार के लिए समय नही है तो आप मुझ से आशा क्यों करते हैं।
नेताजी ने फोन काट दिया और अब व्हाट्सएप पर स्टेटस लगा रहे हैं।

Comments

  1. बहुत सुंदर भाई साहब जी। आपने सटीकता से बताया क्योंकि हम सब ऐसे ही झेलते है 👌🙏

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