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पेड़ लगा कर उसकी देखभाल संतान की तरह करें: विजय जुनेजा

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ऋषिकेश               आज माधव सेवा विश्राम सदन में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के स्वयंसेवको द्वारा उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के उपलक्ष्य में वृक्षारोपण किया गया I इस अवसर उनके द्वारा फलदार व छायादार वृक्ष लगाये I वृक्षारोपण में छोटे छोटे बच्चो ने बढचढ़ कर भाग लिया I कार्यक्रम के उपलक्ष में वरिष्ठ प्रचारक विजय जुनेजा जी ने स्वयंसेवको को हरेला का महत्त्व बताया I  वीरभद्र मंदिर मार्ग पर स्तिथ माधव सेवा विश्राम सदन में हरेला के उपलक्ष्य में वृक्षारोपण किया गया, इस अवसर पर वरिष्ठ प्रचारक विजय जुनेजा जी ने कहा कि मानव शरीर पंच तत्वों से मिलकर बना है, जिन्हें शरीर प्रतिदिन प्रकृति के माध्यम से गृहण करता है I जल एवं पर्यावरण मानव जीवन का अभिन्न अंग है यदि हम प्रकृति एवं पर्यावरण को सुरक्षित रखते हैं तो यह ईश्वर की सबसे अच्छी साधना है I हमारे बड़ों ने जो पर्यावरण की अलख जगे थी उसका उद्देश्य यह है कि हम अपने पर्यावरण को इन पर्वो के माध्यम से सुरक्षित रख सकेI वास्तव में यह पर्व एक मार्गदर्शन व उत्प्रेरक का दिवस है जिसस...

रिश्तेदार नेता जी के परेशान शर्मा जी

आज शर्मा जी मन ही मन बड़े खुश थे, मानो मन से बहुत बड़ा बोझ हट गया हो। आज उन्होंने स्वभाव के विपरीत सामने वाले को कड़वी परन्तु सही बात बोल दी थी। दरसल क्या है शर्माजी एक सम्मानित स्वास्थ्य संस्थान में नौकरी करते हैं प्रतिदिन ढाई हजार से तीन हजार मरीज हॉस्पिटल में उपचार के लिए आते हैं। भीड़ ज्यादा होने के कारण लोग कोई जानकर खोजते हैं। शर्मा जी पास के जिले के हैं तो आगन्तुक ज्यादा ही आते रहते हैं। पहले पर्चा बनवाने से शुरू होकर बात जाँच कराने एडमिशन कराने से लेकर ऑपरेशन तक चलती है।बात यहीं खत्म हो जाये तो कोई बात नही,परेशानी तब होती है जब वो घर जाकर जानकर रिश्तेदारों में शेखी बघारते हैं कि भीड़ थी पर मेरा काम कैसे हो गया।इससे रोज दिखाने वालो की लाइन लम्बी होती जा रही थी कि सेवा से शुरू हुआ काम सिरदर्द बनता जा रहा था।हालत ये थी कि लोगो के रात में दिन में हर समय फोन आते। एक नेताजी ने तो हद कर दी थी, कभी वो जानकर भाभी के लिए कॉल करते कभी रिश्तेदार के लिए। शर्मा जी इतने परेशान कि फोन न उठायें। फोन रिसीव न करना गलत है मगर इतने लोगो के फोन आते थे कि क्या करें क्या न करे परेशान थे, पर जब भगवान सोलुशन...

भगवान परशुरामजी जैसे महापुरूषों के जीवन चरित्र को पाठ्यक्रमों में पढ़ाये जाने की आवयश्कता:- महापौर अनिता ममगाई

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ऋषिकेश। ( जितेंद्र शर्मा)                          आज के समय में बच्चों को भगवान परशुराम जी का जीवन चरित्र पाठ्यक्रम में पढ़ाये जाने की आवयश्कता है। नई पीढ़ी को ज्ञानवान बनाने के साथ संस्कारवान बनाने की भी जरूरत है उक्त विचार श्री परशुराम सभा द्वारा भगवान परशुरामजी की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में महापौर श्रीमती अनिता ममगाई जी ने व्यक्त किये। इस अवसर पर महामंडलेश्वर ईश्वरदास जी ने कहा कि राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए शास्त्र के साथ शस्त्र की भी आवयश्कता है, नई पीढ़ी को भगवान परशुरामजी जी के जीवन से शिक्षा लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज इस विचार की आवयश्कता है कि एक हाथ मे शिक्षा यानी शास्त्र होने चाहिए परन्तु यदि धर्म रक्षा के लिए हमे शस्त्र उठाने पड़े तो पीछे नही हटेंगे।उन्होंने कहा कि समाज के लिए प्रत्येक व्यक्ति के छोटे छोटे प्रयास से बड़े बड़े कार्य आसानी से हो जाते हैं। कार्यक्रम में महापौर श्रीमती अनिता ममगाई ने कहा कि महापुरुषों के जीवन से हमे प्रेरणा मिले इसके लिये उनके जीवन को पाठ्यक्रम ...

युवा ही दिलाएंगे भारत को विश्व गुरु का दर्जा-जितेंद्र फौजी।

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ऋषिकेश युवा ही दिलाएंगे भारतवर्ष को विश्व गुरु का दर्जा-जितेंद्र फौजी। आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के सभागार में आयोजित पुस्तक विमोचन के कार्यक्रम में उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल जी ने जितेंद्र फौजी को उनके कार्यो के लिए सम्मानित किया।इस अवसर पर जितेंद्र फौजी ने हिंदी संवाद से वार्ता में बताया कि आज दुनिया मे भारत सबसे युवा देश है, भारत को पूर्व में विश्व गुरु का दर्जा प्राप्त था। जब दुनिया शिक्षा के ककहरा का ज्ञान ले रही थी उस समय भारत मे विश्वविद्यालय हुआ करते थे। भारत ने तमाम अविष्कार किये,धर्म ज्ञान दिया लेकिन मध्य में कुछ शताब्दियों में विदेशी आक्रांताओं के कारण वह संस्कृति ज्ञान वैभवता सब नष्ट हो गई। उन्होंने कहा हमारे यहाँ दुनिया के सबसे प्राचीन ग्रँथ है जिन्हें हम वेद कहते हैं।हमारे यहाँ वायु विज्ञान नाड़ी विज्ञान, अर्थ शास्त्र ,आयुर्वेद, शल्य चिकित्सा, वास्तु, तकनीक , सैन्य शास्त्र आदि विधाएं तब से हैं जब दुनिया शिक्षा नही जानती थी।यह कहना गलत न होगा कि दुनिया दुनिया के अधिकांश अविष्कार भारत से चुराये गये हैं और हम मूक बने देखते रहे।आज सौभाग्य से देश...

इदम फार्मेसियाय इदम न मम

मेरा मन था कि इस बार कार्यालय में एक अच्छी शुरुआत हो जिसमें नये वर्ष पर हम अच्छा कार्य करने वाले लोगो का सम्मान कर सकें।चूंकि फार्मासिस्ट डे पर हमारे यहाँ से रवि जी और बलूनी जी को सम्मानित किया जा चुका था तो मेरे और रवि जी के मन मे विचार आया कि क्यो न मीनाक्षी,हिमानी और सुषमा को एक प्रतीक चिन्ह भेंट किया जाये।इस बात पर लगभग सारी तैयारी पूर्ण हो चुकी थी।अब समस्या ये थी कि हिमानी वो गिफ्ट स्वीकार करेगी या नही।हिमानी मतलब एक कट्टर सिद्धान्ति, नये काम करना,सीखना और टास्क लेकर उसे 100% तक ले जाना और अपने बनाये नियमो का पालन करना।ऐसे इंसानों के नियम बड़े कठिन होते हैं मगर वो अनुशासन उसके जीवन मे हर पल दिखाई देता है। बस समस्या ये थी कि ये कार्यक्रम उसके व्यास में फिट बैठेगा या नही।इसके लिये हमें ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जो बिल्ली के गले मे घँटी बांध दे। वो एक ही शख्स थी "मीनाक्षी"।बड़े सम्मान से उसे बुलाया, बडे आराम से चुपचाप उसे बात समझाई औऱ कमाल की बात वो समझ भी गई कि उसे बड़े प्रेम से बलि का बकरा बनाया जा रहा है।हमने उसे समझाया कि तुम्हे पुरस्कार के लिए हिमानी को तैयार करना है।उसे स्त...

राष्ट्रीय स्वम सेवक संघ राष्ट्र भक्तों का महा कुम्भ।

राष्ट्रीय स्वम सेवक संघ राष्ट्र भक्तों का महा कुम्भ। जितेंद्र कुमार शर्मा वर्ष 2025 आरएसएस रूपी वट वृक्ष एक सदी का गवाह बन जायेगा।इस काल खंड में संघ चला रुका फिर दौड़ा, कभी प्रतिबंध लगा तो कभी प्रतिबंध हटे मगर राष्ट्र प्रेम की यह अविरल धारा निरन्तर बहती रही। 1925 में विजयदशमी के दिन जिस संगठन की नींव नागपुर में 12 लोगो की शाखा से पड़ी थी आज वो शाखाएं विश्व भर में व्यक्ति निर्माण में लगी हैं।यह अनुशासन निरन्तर लग्न का ही नतीजा था कि जिस रायसीना हिल्स से कभी संघ पर प्रतिबंध लगे थे आज उस रायसीना पर उसी संघ के स्वम सेवक का कब्जा है। आप अंदाज लगा सकते हैं कि डॉ बलिराम हेडगेवार जी ने कॉंग्रेस में रहते हुए जिस संगठन की परिकल्पना की थी उस संगठन से देश भर से हजारों युवा जुड़े और पूर्णकालिक रहने का प्रण लिया।बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के एमएससी के छात्र ने एक ऐश्वर्यपूर्ण जीवन छोड़ा और देश भर में संघ का विस्तार कर दिया, जिन्हें सभी स्वम सेवक आदरभाव से गुरु जी बुलाते हैं। आज लाखो कार्यकर्ता ऐसे हैं जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने का प्रण लिया है। जिस उम्र में युवा मन मे यौवन अंगड़ाई मार...

योग क्या है।

जब पहली बार टीवी आया तो स्टूडियो से टीवी तक सिग्नल पहुचाने या यूं कहें कि हमे दुनिया से जोड़ने का साधन था एक एल्युमिनियम का एंटीना। यदि टीवी में अचानक चलते चलते उसका प्रसारण गड़बड़ा जाता था तो हम छत पर जाते और उसकी डायरेक्शन सही करते।डायरेक्शन सही होते ही टीवी पर फिर कार्यक्रम शुरू हो जाते। बस उस डायरेक्शन को ही सही करने का मतलब योग है,यानी खुद को अपने अंदर देखते हुए ब्रह्मण्ड से जोड़ने का नाम ही योग है।जब हम प्रकृति के निकट होते हैं तो हम जो co2 छोड़ रहे होते हैं पेड़ उसे ग्रहण कर रहे होते हैं।पेड़ जो चीज (O2) छोड़ते हैं उसे हम ग्रहण कर रहे होते हैं।हमे पता भी नही चलता और यह आदान प्रदान हो चुका होता है।यानी हमारे प्राण (श्वास) की व्यवस्था वो पेड़ कर रहे होते हैं प्रकृति से यही जुड़ाव योग है,मगर हमे इसका भान भी नही होता और हम उन्हें काट देते हैं। दरसल हमारे आसपास बृह्मांड में बहुत सी ऐसी घटना घटनाये घटित होती हैं जिनका हमे ज्ञान नही होता और वो हमारे लिए ही होती हैं।इसी ब्रह्मांड से खुद को जोड़ने की साधना को योग कहते है। दुनिया मे जितनी भी चीजे हैं जैसे कम्प्यूटर,इंटरनेट, बस, कार, यहाँ तक की वेंटि...