इदम फार्मेसियाय इदम न मम

मेरा मन था कि इस बार कार्यालय में एक अच्छी शुरुआत हो जिसमें नये वर्ष पर हम अच्छा कार्य करने वाले लोगो का सम्मान कर सकें।चूंकि फार्मासिस्ट डे पर हमारे यहाँ से रवि जी और बलूनी जी को सम्मानित किया जा चुका था तो मेरे और रवि जी के मन मे विचार आया कि क्यो न मीनाक्षी,हिमानी और सुषमा को एक प्रतीक चिन्ह भेंट किया जाये।इस बात पर लगभग सारी तैयारी पूर्ण हो चुकी थी।अब समस्या ये थी कि हिमानी वो गिफ्ट स्वीकार करेगी या नही।हिमानी मतलब एक कट्टर सिद्धान्ति, नये काम करना,सीखना और टास्क लेकर उसे 100% तक ले जाना और अपने बनाये नियमो का पालन करना।ऐसे इंसानों के नियम बड़े कठिन होते हैं मगर वो अनुशासन उसके जीवन मे हर पल दिखाई देता है। बस समस्या ये थी कि ये कार्यक्रम उसके व्यास में फिट बैठेगा या नही।इसके लिये हमें ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जो बिल्ली के गले मे घँटी बांध दे। वो एक ही शख्स थी "मीनाक्षी"।बड़े सम्मान से उसे बुलाया, बडे आराम से चुपचाप उसे बात समझाई औऱ कमाल की बात वो समझ भी गई कि उसे बड़े प्रेम से बलि का बकरा बनाया जा रहा है।हमने उसे समझाया कि तुम्हे पुरस्कार के लिए हिमानी को तैयार करना है।उसे स्तिथियाँ समझाई गई। फिर तय हुआ कि चलो वोटिंग करते हैं मतलब बकरा बड़ी सफाई से अपनी गर्दन निकाल चुका था। तभी वोटिंग की बात हुई तो हिमानी बोल उठी कि कोई सरप्राइज नही था, भैय्या हमे सब सुनाई दे रहा था कि गुस्से में मुह लाल हो जायेगा,ये हो जायेगा,वो हो जायेगा, हाँ हाँ बोलो।मीनाक्षी चुपचाप अपने कम्प्यूटर पर ऐसे बैठ गई जैसे वो बहुत बड़े प्रोजेक्ट में लगी हो।रवि जी चुप, बचा मैं, मैंने फटाफट पर्चियां बनाई और बोला कि चलो वोटिंग करते हैं। बड़े मजाकिया अंदाज में निष्पक्ष मतदान हुआ। मतदान प्रतिशत लगभग 92 प्रतिशत था क्योकि हिमानी ने मतदान में भाग नही लिया था। पहले तीन नामो की घोषणा हुई मोहित ने फिर से बाजी मारी थी, रवि जी ने कृपलानी जी की तरह अपने वोट अमित जी को ट्रांसफर कर दिए थे मगर उन तीन में भी हिमानी का नाम था। हँसी मजाक के बाद तय हुआ कि एक जनवरी को विजेताओ को इनाम दिये जायेंगे। जब सभी घर जा रहे थे तो हिमानी मेरे पास आयी, वही चेहरा लाल "यहाँ चेहरा लाल से सम्बन्ध गुस्से से नही है दरसल वो उम्र में काफी लोगो से छोटी है और जब उसे लगता है कि सामने वाला कहीं न कहीं गलत है तो उसे सम्मान के साथ समझाते समय उसका चेहरा हल्का सा लाल हो जाता है"  हिमानी ने कहा भैय्या हमे उन लोगो को प्रोत्साहित करना चाहिए जो नये हैं हमसे उम्र में कम हैं जिससे वो ज्यादा प्रोत्साहित हों, पेन उठाया और अपने नाम पर कलम चलाते हुए यह कह कर चली गई कि बाकी को पुरुस्कार जरूर मिले हमे इसकी जरूरत नही होनी चाहिए।अब भूली (छोटी बहन) को ये कौन समझाये कि हम भी तो वही कर रहे थे।
इस सबके बीच सबसे बढ़िया बात ये निकली कि सभी कुछ एक अच्छे फैमली ड्रामे की तरह सुखद अंत के साथ समाप्त हुआ। पहले जिन तीन नामो पर विचार चल रहा था वो तीनो नही थे, यानी मैं और रवि जी गलत साबित हुए मगर कोई ग्लानि नही, जिन तीन को पुरस्कार मिलने की बात थी पर नही मिला उन्हें कोई कुंठा नही, जिन्हें मिला उन्हें कोई अहंकार नही और जिनका नाम नही आया उन्हें कोई द्वेष नही, बस यही भावना हमे मजबूत बनाती है। हम सब अगले दिन सब बातें भूल चुके थे तभी मीनाक्षी उठी और बोली कि चलो भैय्या आज फिर वोटिंग कर लें और सब हँस रहे थे।

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