योग क्या है।

जब पहली बार टीवी आया तो स्टूडियो से टीवी तक सिग्नल पहुचाने या यूं कहें कि हमे दुनिया से जोड़ने का साधन था एक एल्युमिनियम का एंटीना। यदि टीवी में अचानक चलते चलते उसका प्रसारण गड़बड़ा जाता था तो हम छत पर जाते और उसकी डायरेक्शन सही करते।डायरेक्शन सही होते ही टीवी पर फिर कार्यक्रम शुरू हो जाते।
बस उस डायरेक्शन को ही सही करने का मतलब योग है,यानी खुद को अपने अंदर देखते हुए ब्रह्मण्ड से जोड़ने का नाम ही योग है।जब हम प्रकृति के निकट होते हैं तो हम जो co2 छोड़ रहे होते हैं पेड़ उसे ग्रहण कर रहे होते हैं।पेड़ जो चीज (O2) छोड़ते हैं उसे हम ग्रहण कर रहे होते हैं।हमे पता भी नही चलता और यह आदान प्रदान हो चुका होता है।यानी हमारे प्राण (श्वास) की व्यवस्था वो पेड़ कर रहे होते हैं प्रकृति से यही जुड़ाव योग है,मगर हमे इसका भान भी नही होता और हम उन्हें काट देते हैं।
दरसल हमारे आसपास बृह्मांड में बहुत सी ऐसी घटना घटनाये घटित होती हैं जिनका हमे ज्ञान नही होता और वो हमारे लिए ही होती हैं।इसी ब्रह्मांड से खुद को जोड़ने की साधना को योग कहते है। दुनिया मे जितनी भी चीजे हैं जैसे कम्प्यूटर,इंटरनेट, बस, कार, यहाँ तक की वेंटिलेटर जैसी चीजें जब आप इनका अध्यात्म की दृष्टि से अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि ये सब चीजें हमे ब्रह्मांड से जोड़ने का प्रयास भर हैं।

जितेंद्र शर्मा

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